सुख दुःख

सुख दुःख
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थोडा सुख होना
थोडा दुःख होना
जो भी होना अच्छा होना रे
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में तेरे लिए गाऊ
तेरा बन जाऊ
ऐसी जिंदगानी जीना रे
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ये कैसी कैसी दुनिया
ये क्या हे दुनियादारी
ये कैसे रिश्ते नाते
ये कैसी मारामारी
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सब झूटी झूटी दुनिया, ये झूटी दुनियादारी
सब झुटे रिश्ते नाते, ये कैसी मारामारी
जो सिनेमे कटारी होना रे
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में तेरे लिए गाऊ
तेरा बन जाऊ
ऐसी जिंदगानी जीना रे
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हे झूटी मेरी बाते
झूटे हे इरादे
झूटी मेरी चाहत
और झूटे मेरे सपने
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हे झूटी मेरी बाते, सब झूटे हे इरादे
झूटी मेरी चाहत, और झूटे मेरे सपने
मेरे सपने सच ना होना रे
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में तेरे लिए गाऊ
तेरा बन जाऊ
ऐसी जिंदगानी जीना रे
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ना कोई मेरा अपना
ना कोई हे पराया
तनहाई ने सिखाया
बस तू और तेरा साया
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ना कोई मेरा अपना, ना कोई हे पराया
तनहाई ने सिखाया, बस तू और तेरा साया
अन्धेरोमे साया भी खोनारे
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में तेरे लिए गाऊ
तेरा बन जाऊ
ऐसी जिंदगानी जीना रे
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थोडा सुख होना
थोडा दुःख होना
जो भी होना
अच्छा होना रे
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॥ विश्वामित्र ॥
कविता संग्रह ‘जाना – बनजाना’
काम जारी हे…

सब तेरा

सब तेरा
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ये जमी या आसमा
ये हर दिशा तेरी
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ये रंग भी सुगंध भी
खुली हवा तेरी
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ये चन्द्रमा ये तारका
ये सूर्य भी तेरा
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ये कारवा ये पासबा
ये गुलसिता तेरा
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ये जिंदगी तेरेनाम हे
ये रोशनी तेरेनाम हे
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ये ख्वाइशे ये चाहते
ये मुश्किलें तेरी
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ये सुकून ये शांतता
ये दर्द भी तेरा
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मेरा मन मेरी घडन
जो हे मेरा तेरा
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ये आत्मा शरीर भी
ये जीवन तेरा
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ये जिंदगी तेरेनाम हे
ये रोशनी तेरेनाम हे
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॥ विश्वामित्र ॥
कविता संग्रह ‘जाना – बनजाना’
काम जारी हे…

दिल पतंग

दिल पतंग
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दिल पतंग दिल पतंग
आसमान में उड़े जा रहा हे
भूल जा हर दिशा
हर दिशा नशा छा रहा हे
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ये हवा संग तेरा तन चले जहा

तू वहां जाएगा
ये घटा संग तेरा मन चले
तू वहां जाएगा
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जो जमी पाएगा
वो तेरा जहा बन जाएगा
पर अगर पर झड जाए
तो ये हवा… कुछ कर न पाए
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दिल पतंग दिल पतंग

आसमान में उड़े जा रहा हे
भूल जा हर दिशा
हर दिशा नशा छा रहा हे

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दिल तरंग दिल तरंग
जल जल में खिले जा रहा हे
हर लहर हर लहर
हर सफ़र में नशा हो रहा हे
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जो मिला … तू भीतर समाना
जो समाया …  वो तू बन जारे
खुद की खोज में तू बेह जाए
खुद से मिल तू खुश हो जाए
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दिल तरंग दिल तरंग
जल जल में खिले जा रहा हे
हर लहर हर लहर
हर सफ़र में नशा हो रहा हे
~
॥ विश्वामित्र ॥
कविता संग्रह ‘जाना – बनजाना’
काम जारी हे…

में तेरेबिना कैसे जीना

में तेरेबिना कैसे जीना
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में तेरेबिना कैसे जीना
तेरेबिना कैसे जीना ?
तेरेबिना कैसे जीना
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तू नाही कोई नाही
कोई नाही तेरेबिन
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दिन नाही शाम नाही
रैन नाही तेरेबिन
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सुख नाही दुःख नाही
चैन नाही तेरेबिन
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में तेरेबिना कैसे जीना
तेरेबिना कैसे जीना ?
तेरेबिना कैसे जीना
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बिन तेरे दिल की नदिया बहती नहीं हे
बिन तेरे मन की चिड़िया गति नहीं हे
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बिना तेरे चैनं की निंदिया क्या सोउ
बिना तेरे नैनं क्या सपने दिखाऊ
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बिना तेरे गीतोके स्वर कैसे गाऊ
बिना तेरे हर पल में कैसे बिताऊ
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बिना तेरे मन को मेरे कैसे समझाऊ
बिना तेरे जीवन का मतलब क्या पाऊ
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में तेरेबिना कैसे जीना
तेरेबिना कैसे जीना ?
तेरेबिना कैसे जीना
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तू नाही कोई नाही
कोई नाही तेरेबिन
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दिन नाही शाम नाही
रैन नाही तेरेबिन
.
सुख नाही दुःख नाही
चैन नाही तेरेबिन
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में तेरेबिना कैसे जीना
तेरेबिना कैसे जीना ?
तेरेबिना कैसे जीना
~
॥ विश्वामित्र ॥
कविता संग्रह ‘जाना – बनजाना’
काम जारी हे…

जाना – बनजाना

जाना बनजाना
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जाना वो बनजाना
मन जाना वो बनजाना
सुध बुध मन की खोती रहेगी
ऐसी बाते होती रहेगी
तू जो जाना वो बनजाना
जाना वो बनजाना
मन जाना वो बनजाना
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यु लाखो सपने लेके
यु लोग चल रहे हर दिशा
हर दिशा कम पड जाए
अगर तू ढूंडे जो तेरे भीतर हे बसा
वो तो तेरे भीतर ही हे
वो तो तेरे भीतर ही हे
तेरा मन क्यू मानत नाही
तेरा दिल क्यू जानत नाही
ऐसी मज़बूरी में
कौन जिया कौन जिया
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सुध बुध मन की खोती रहेगी
ऐसी बाते होती रहेगी
तू जो जाना वो बनजाना
जाना वो बनजाना
मन जाना वो बनजाना
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तू खो न जाना
जो मिला
वो बेशक खो देना
फिर कुछ नया पाना
ये पाना खोना
खेल खेलना
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पर खुद न खोना
इस मायाजाल में
तू खो न जाना
तू खो न जाना
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माटी मन बर्तन बनजाना
तेरा नाम में हर पल गाना
दूषित मन निर्मल बन जाना
मन जो जाना वो बनजाना
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सुध बुध मन की खोती रहेगी
ऐसी बाते होती रहेगी
तू जो जाना वो बनजाना
जाना वो बनजाना
~
॥ विश्वामित्र ॥
कविता संग्रह ‘जाना – बनजाना’
काम जारी हे…

खेल

खेल
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इस जिंदगी के खेल में
कुछ हार हे, कुछ जीत हे ।
सब कुछ यहाँ पर कुछ नहीं
ऐसी अजीबो रित हे ।
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क्या सही क्या हे नहीं …?
क्या सही क्या हे नहीं
इस खोज में खोता रहा ।
ढूंढे कहानी अनकही
हर दिशा में जा रहा ।
ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी
ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी ॥
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क्यों किया ? कैसे किया ?
कुछ ये किया कुछ वो किया
अच्छा लगा अपनालिया ।
कुछ ये किया कुछ वो किया
जो था गलत दफानादिया ।
ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी
ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी ॥
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में कही मंजिल कही?
में कही मंजिल कही
और क्या बनी ये जिंदगी।
तू सही बस तू सही
तेरे सिवा कोई नहीं।
ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी
ऐसे जिया ऐसे जिया जिंदगी ||
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इस जिंदगी के खेल में
अब क्या बचा आराम हे ?
इस जिंदगी के खेल में
अब क्या बचा आराम हे।
तू वो ही कर जो मन में हे तेरे
बस वो ही कर जो मन में हे तेरे।
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बस वो ही कर जो मन में हे
बस वो ही कर जो मन में हे
हर काम में फिर राम हे ।
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तू वो ही कर जो मन में हे
हर काम में फिर राम हे ॥
राम हे ।
~
॥ विश्वामित्र ॥
कविता संग्रह ‘जाना – बनजाना’
काम जारी हे…