राधेशाम

राधेशाम
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पानी में मछली बने
तू पंछी बने आसमा में
लाखो हे रूप तेरे
तू ही हर दिशा इस जहा में
राधेशाम राधेशाम
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में जी रहा हु इस माया नगरिया में
तेरी परछाई मेरी छाव हे
अब तुझसे में क्या सब छुपाऊ
तुनेही लिखी ये कहानी
में खुदसे यु अब न जी पाउ
तेरे नाम हे जिंदगानी
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अंधेरोमे सूरज बने
तू पानी बने रेगिस्तान में
तू धुप में तरुवर बने
तुही हर दिशा इस जहामे
राधेशाम राधेशाम
~
॥ विश्वामित्र ॥
कविता संग्रह ‘हरिहर हरिहर’
काम जारी हे…

भोलेनाथ तेरेसाथ

भोलेनाथ तेरेसाथ
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भोलेनाथ तेरेसाथ हे
तू ना पाना खुद को अकेला
तनहा बेघर अनाथ रे
भोलेनाथ तेरेसाथ हे
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भोले बिना, क्या सुखदुख तू जाना,
क्या जीवन तूने जिया रे
शिव के बिना, क्या समझ क्या पाया,
क्या अमृत तूने पिया रे
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भोले हे साथी, भोले सखा हे
भोले हे साथी, भोले दवा हे
भोले समंदर, भोले समां हे
तेरे उल्झनोकि भोले दुवा हे
भोलेही शिव हे, भोले सखा हे
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अगर तू दुखी हे, अगर तू खफा हे
अगर तू हे कातिल, अगर तू बुरा हे
अगर तू हे खोया, अगर तू हे डूबा
अगर तेरी राहोपे कठिनाइया हे
अगर तेरी आखोपे छाया अँधेरा
मन तेरा चंचल हे माया में खोया
भोले की मंदिर में भक्तोका मेला
तू ना पाना खुद को अकेला
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तू ना पाना खुद को अकेला
तनहा बेघर अनाथ रे
भोलेनाथ तेरेसाथ हे
~
॥ विश्वामित्र ॥
कविता संग्रह ‘हरिहर हरिहर’
काम जारी हे…